Monday, July 14, 2014

India TV की कोई एंकर हैं तनु शर्मा . उन्होंने दिल्ली में किसी मेट्रो स्टेशन से कूद कर आत्महत्या करने की कोशिश की है . खबर है की मरी नहीं हैं ........बच गयी हैं और किसी अस्पताल में भर्ती हैं . स्वाभाविक है , लोग India TV को कोस रहे हैं .....रजत शर्मा को कोस रहे हैं . पर मुझे इस लडकी से बड़ी निराशा हुई है . ज़ाहिर सी बात है की वो अपनी ज़िन्दगी को मैनेज नहीं कर पाई और इस हद तक mismanage किया की नौबत खुदकुशी तक आ पहुंची . और कितनी बड़ी failure है ये लडकी .....यहाँ भी fail हो गयी ? जो व्यक्ति कायदे से ख़ुदकुशी भी न कर सके वो कॉर्पोरेट जगत में कामयाब होना चाहता है ? गलती इंडिया टीवी की है . क्यों निकाल रहे हैं मुझे नौकरी से ? नकारे निकम्मे आदमी को कौन रखेगा जनाब ? अरे दिल्ली में रहती हो . कूदने के लिए मेट्रो स्टेशन ही मिला था ? तीन तल्ले से कूद के मरना चाहती हो ? इतनी ऊंची ऊंची इमारतें हैं दिल्ली में . इतनी अक्ल भी नहीं ? 32 वे माले से कूदती ........

बहुत पहले पटना में किसी लडकी ने सफलता पूर्वक ख़ुदकुशी कर ली थी . तो एक लड़की ने उसे संबोधित कर एक खुला पत्र लिखा था किसी अखबार में . उसने पूछा था उस से ..........इतनी जल्दी हार मान ली तुमने ........लड़ने का माद्दा नहीं था .....हार मान ली ? आसान रास्ता चुन लिया ? समस्याओं से मुक्ति पाने का ......... पर जाते जाते हम लोगों को क्या सन्देश दे कर गयी हो ? हम , जो दिन रात लड़ रहे हैं ......संघर्ष कर रहे हैं ........... हार मानने को तैयार नहीं हैं .....लड़ रहे हैं ........... लड़े जा रहे हैं ......... हमें क्या सन्देश दे कर गयी हो .........की हम भी हार मान लें .....और चुन लें एक आसान रास्ता .........सभी समस्याओं से छुटकारा पाने का ........

तनु शर्मा .....अब एक सवाल तुम से है .......... माना की मरने के लिए सौ कारण रहे होंगे ......पर ज़िंदा रहने के लिए क्या एक भी कारण नहीं बचा था ? क्या वो एक कारण उन सौ पे भारी नहीं पड़ता था ? क्या ज़िन्दगी में सफलता के मायने सिर्फ एक बड़ी पोजीशन , बड़ा घर और बड़ी गाडी ही है ........ माना की दिक्कतें रही होंगी पर क्या वो दिक्कतें Stephen Hawking की दिक्कतों से ज़्यादा बड़ी हैं जिन्हें 20 बरस की उम्र में ही गर्दन से नीचे लकवा मार गया था फिर भी उनके हौसले पस्त न कर सका और वो लकवा ग्रस्त लड़का दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक बन गया ........... या फिर अरुणिमा सिन्हा , जिसने अपनी टांग कटवा ली थी गाड़ी से गिर के पर वो कटी हुई टांग भी उसे Mt Everest पे चढ़ने से रोक नहीं पाई .........

तनु शर्मा , वहाँ उस स्टेशन से गिर के हो सकता है की तुमने अपनी टांगें तुडवा ली हों , या कमर ........पर याद रखना .......सब कुछ अब भी ख़तम नहीं हुआ है .......... ये दुनिया अब भी वहीं है और अब भी बुला रही है तुम्हे .....आओ और मुझे जीत लो ....... ज़िंदा रहने के और बहुत से कारण होंगे ......और ये जान लो की आज ज़िंदा रहना भी एक बहुत बड़ी सफलता है ................
कुख्यात आतंकी जिसे सरदार जी लोग संत जरनैल सिंह भिंडराँवाला कहते थे वो अपनी तकरीरों में सिर्फ एक ही बात कहता था ....ए सिखों , हिन्दुओं और हिंदुत्व से बचो ....ये अजगर तुम्हे निगल जाएगा . वैसे बात वो गलत नहीं कहता था . हिंदुत्व ने अपने अनुयायियों को स्वतन्त्रता दी है ....सोचने समझने की , बोलने की ....न कोई fixed patent पूजा पद्धति , न कोई किताब और न कोई देवी देवता भगवान् .......... जैसे मर्जी जिसे मर्जी पूज लो , जो मर्जी किताब पढ़ लो , न पसंद आये तो नयी लिख लो ....... इसी स्वतन्त्रता से नए नए सम्प्रदाय और नयी सोच उपजी ....उस ज़माने में बौद्ध और जैन उपजे ...वाम मार्ग आया ....और ऐसे ना जाने कितने आये ......सिखी को आये तो जुमा जुमा ३०० साल हुए हैं ....और इसका तो प्रसार ही कुछ नहीं ......बौद्ध धर्म तो पूरी दुनिया में फ़ैल गया था ....पर फिर क्या हुआ ? भारतीय उपमहाद्वीप में बौद्ध और जैन दोनों पुनः हिंदुत्व में आ मिले .......... अब आप इसे चाहे जो कह लो ....अजगर खा गया या नदी की धारा जो अलग हुई थी पुनः नदी में आ मिली .........सिख धर्म धीरे धीरे पुनः हिन्दू धर्म में आ मिलेगा ......... क्योंकि दोनों का DNA एक ही है ...........

रही बात साईं बाबा की ....... हिंदुत्व में आजादी है भैया ....चाहे जिसे पूज लो ........ साईं बाबा पूज लो , या फिर निर्मल बाबा ........या अपनी मुकेरियां वाली राधे माँ ..........शंकराचार्य कहते हैं , मत पूजो ...... हिन्दू हैं भैया ......नहीं मानेंगे , और तुम साले मुहम्मद मत बनो ....... यहाँ ईशनिंदा कानून नहीं चलेगा ....... ये हिन्दू हैं ....इसी तरह पूज पाज के फिट रहेंगे ......... और जहां तक बात है , की जो तुमने ये कहा की जो साईं को पूजे वो राम कृष्णा न पूजे , गंगा न नहाए ........तो इसी को चूतियापा कहते हैं ..........

उस ज़माने में मुसलमान चोरी से गाय का कान काट के कुए में डाल देते थे और तुम्हारे जैसे चूतिया पोंगा पंडित सुबह उठ के कह देते थे की ....ओह्ह ....तुम लोग तो मुसलमान हो गए क्योंकि उस कुए का पानी पी लिया .......... मुसलमान गर्दन पे तलवार रख के ज़बरदस्ती कलमा पढवा लेता था पर तुम पोंगा पंडितों में ये अक्ल और ये हिम्मत न थी की अगले दिन तुम उन बेचारों को ये कह सको की अरे चलो ....कुछ नहीं हुआ ...... ऐसे कैसे मुसलमान बन गए ...ये लो दो बूँद गंगा जल और फिर से हो गए शुद्ध .....आज जो देश में ये १४ करोड़ मुसलमान दिख रहे हैं ये सब तुम्हारे जैसे पोंगा पंडितों के कारण ही हुए ....उस ज़माने में चाहते तो तुम इन सबको वापस अपने में मिला सकते थे ..........

इसलिए अब बड़के पोंगा पंडित न बनो .....पूजने दो .....साईं को पूज के भी हैं तो हिन्दू ही न ......तुम्हारा बस चला तो तुम इनको भी मियाँ बना डालोगे ......जहां तक जागृति की बात है , उन्हें educate करने की बात है , साईं की पोल खोलने की बात है , वो ज़रूरी है और उसके और बढ़िया तरीके भी हैं ........ ये सब साईं को पूज पाज के फिर वापस हिन्दू बन जायेंगे .....बहुत फिकिर मत करो ........पर उन्हें ज़बरदस्ती मियाँ मत बनाओ .......

समझे Mr शंकराचार्य ............
एक बार सुनते हैं की लन्दन शहर में बिजली का कोई ऐसा ब्रेकडाउन हुआ की पूरे शहर में 8-10 घंटे तक बिजली न रही . ये भी सुना है की लन्दन दुनिया का सबसे ज़्यादा सभ्य सुसंस्कृत शहर है . फिर सुनते हैं की ये हुआ की सभ्य सुसंस्कृत शहर के सभ्य लोगों को धीरे धीरे ये मालूम चल गया की आज बिजली नहीं है इसलिए चप्पे चप्पे पे लगे हुए CCTV कैमरे आज काम नहीं कर रहे हैं . बस उन्होंने सारी इमानदारी और सभ्यता ताक पे रख दी और फिर पूरे शहर में वो लूटपाट हुई की कब्र में लेटा महमूद गजनवी भी शर्मा गया होगा . भाई तो भाई बहना लोग भी और बूढी आंटियां भी अपनी कारों में लूट का सामान भर के ले जाती दिखी . इसे कहते हैं जनता पे ज़बरदस्ती थोपी गयी शराफत और सभ्यता . जैसे ही मौक़ा मिला , सारी सभ्यता घुस गयी तेल लेने और अन्दर का शैतान बाहर आ गया . मुझे ये समझ आया की सिर्फ पुलिस और CCTV कैमरे की निगरानी के कारण लोग मजबूरी में शरीफ बने हुए हैं .

अब इसके इतर भारत की तस्वीर देखिये . amnesty इंटरनेशनल के आंकड़ों में बेशक हम दुनिया के सर्वाधिक भ्रष्ट देशों में गिने जाते हों पर भारत की अधिकाँश जनता अभी भी बेहद इमानदार है . यहाँ CCTV तो छोडिये थाने तक में पुलिस नहीं है . हर हिन्दुस्तानी जानता है की हमारे यहाँ कोई पुलिस नहीं है और जो है वो एकदम निकम्मी है . कुछ नहीं करेगी ........फिर भी वो इस तरह कभी लूटपाट नहीं करता . इमानदारी मूलतः हमारे चरित्र में है . आम हिन्दुस्तानी यदि इमानदार है तो वो किसी CCTV कैमरे या पुलिस के दर से नहीं है . इमानदारी उसका मूल चरित्र है . उसका धर्म है . इसके लिए उसे किसी का भय नहीं चाहिए . इसमें जो भी क्षरण हुआ है वो अब भी दाल में नमक बराबर ही है . डंडे से बहुत दिन तक किसी को discipline में या इमानदार नहीं रखा जा सकता . ईमानदारी चरित्र में , स्वभाव में और संस्कार में होनी चाहिए .

दिल्ली में जब केजरीवाल ने सत्ता सम्हाली तो डंडे के बल पे भ्रष्टाचार दूर करने का प्रयास किया . उसके तात्कालिक परिणाम भी मिले . और वो नाल मढ़ाने लगे की देखो हमने 15 दिन में दिल्ली से भ्रष्टाचार ख़तम कर दिया . पर वो जैसे ही गए , स्थितियां पहले से भी बदतर हो गयी . भ्रष्टाचार का सांप जो डंडे के डर से बिल में छुपा हुआ था , फन काढ़े बाहर आ गया . डंडे से भ्रष्टाचार रोका जाए तो वो तुरंत रिजल्ट देगा , थोड़े समय के लिए तो कम होगा , पर जल्दी ही और विकराल रूप ले लेगा और वापस आ जायेगा .

मोदी ने गुजरात में काफी हद तक भ्रष्टाचार पे काबू किया . उसके लिए उन्होंने डंडे का सहारा नहीं बल्कि गवर्नेंस का सहारा लिया . प्रशासन में ऐसे सुधार किये की भ्रष्टाचार की गुंजाइश ही न रही . इसके बाद टेक्नोलॉजी का सहारा लिया . अभी लोग कह रहे हैं की मोदी को रेल भाडा बढाने की बजाय रेल में व्याप्त भ्रष्टाचार पे नकेल कसनी चाहिए . रातों रात नकेल तो डंडे से कसी जायेगी . मोदी systemic changes ला कर भ्रष्टाचार से लड़ने में यकीन करते हैं . उसमे रिजल्ट धीरे धीरे मिलते हैं पर दूरगामी होते हैं . दीर्घकालिक होते हैं . इस तरीके से यदि भ्रष्टाचार दूर किया जाए तो वो वापस नहीं लौटता . कजरी हर समस्या में थूक से सटा के चिपका देते हैं ....मोदी समस्या की जड़ पे प्रहार करते हैं . इसलिए results आने में समय लगता है ......... धैर्य रखिये ........1000 दिन का समय दीजिये .
एक बार एक मारवाड़ी सेठ ने भोजनालय खोल दिया . चल निकला . मारवाड़ी धार्मिक किस्म का आदमी थी . भगवान् से डरता था . उसने सोचा की इसी में पुण्य कमा लिया जाए . सो उसने no profit no loss पे खाना खिलाना शुरू कर दिया . समय के साथ महंगाई बढ़ी . बेचारे सेठ को गरीब जनता पे दया आ गयी . उसने दाम नहीं बढाए , अपनी जेब से ही हज़ार रु रोज़ ढाबे में डालने लगा . यानि सब्सिडी दे दी . महंगाई और बढ़ी . पर उसने दाम फिर भी न बढाए . सब्सिडी बढ़ गयी . अब थाली सेठ को दस रु में पड़ती थी , पर बेचारा धर्म भीरु , बेचता था 6 रु में . महंगाई बढ़ती गयी , पर उसने दाम न बढाए . सब्सिडी बढाता गया . उधर सस्ते खाने पे लोग टूट के पड़ रहे थे . भीड़ बढ़ती जा रही थी . खाने की क्वालिटी रोज़ गिर रही थी . दाल पानी जैसी हो गयी थी . खाने के नाम पे पतली खिचडी परोस रहा था . किसी ने कहा दाम बढ़ा लो पर खाना बढ़िया खिलाओ ........पब्लिक उखड गयी . नहीं . पहले ही बहुत महंगाई है . ऊपर से तुम भी दाम बढाओगे . सेठ बोला , पैसा नहीं है , कैसे चलाऊँ ? पब्लिक बोली , अन्य विकल्प टटोल लो . सब्सिडी बढ़ा दो , दाल बेशक और पतली कर दो ...... मक्खियाँ भिनक रही हैं , भिनकने दो . कीड़े पड़ गए हैं ....पड़ने दो ....पर दाम न बढ़ाओ . घर द्वार बेच के ढाबे में पैसा लगाओ पर दाम न बढ़ाओ .

सुना है की रेलवे यात्री भाड़े में 32000 करोड़ की सब्सिडी देती है . आंकडा यदि गलत हो तो सुधार दीजिएगा . यानि माल भाड़े से जो पैसा आता है उसे यात्री भाड़े में लगा देती है . इसका मतलब ये हुआ की जब हम दिल्ली से बनारस जाते हैं तो उस यात्रा का लागत मूल्य लगभग 700 रु है पर रेलवे हमसे सिर्फ 350 रु लेती है . मुझे लगता है की हमें उस यात्रा के पूरे पैसे देने चाहिए . जिस से की रेलवे सब्सिडी वाले धन को infrastructure में लगा सके . नयी पटरियां बिछाए . जर्जर पटरियों को बदले . नए रेल डिब्बे बानाने के और कारखाने लगें जिस से की हज़ारों नयी रेलगाड़ियाँ चलें .........आज जो यात्रा 12 घंटे में होती है वो 7 घंटे में पूरी हो ....... आज जो बेचारे लटक के जाते हैं , भूसे की तरह ठूंस के जाते हैं , फर्श पे सो के जाते है , शौचालय के सामने बैठ के जाते हैं ........वो इज्ज़त से चल सकें ........
एक स्कूल में नया हेड मास्टर आया . पहले दिन उसने assembly में सिर्फ एक बात कही . अब मैं आ गया हूँ . अच्छे दिन आने वाले हैं ...... अब स्कूल में किसिम किसिम के लड़के थे और किसिम किसिम के मास्टर . अच्छे दिन की परिकल्पना सबकी अलग अलग होती है . हेड मास्टर ने आते ही डंडा चढ़ा दिया . सबसे पहले अनुशासन का डंडा चढ़ाया .....कोई लेट नहीं आएगा . सब प्रॉपर यूनिफार्म में आयेंगे . कोई एब्सेंट नहीं होगा . कोई क्लास बंक नहीं करेगा . कोई इधर उधर आवारा नहीं घूमेगा . सब मास्टर घंटी लगते ही क्लास में पहुँचो . कायदे से पढाओ . कोई मास्टर स्कूल में पान नहीं खायेगा . इम्तहान में नक़ल नहीं होगी .

कामचोर निकम्मे मास्टरों को लगा की बड़े बुरे दिन आ गए . अच्छे अध्यापकों को लगा की अब आयेगा मज़ा . अब स्कूल जैसा लगता है . अब मैं कायदे से पढ़ाऊंगा .....वाकई अच्छे दिन आ गए . उसी तरह आवारा लड़कों के तो दुर्दिन आ गए . समय से आना . कोई उत्पात नहीं . सिर्फ पढाई पढाई पढाई ......... अच्छे लड़कों को लगा की वाकई अच्छे दिन आ गए ........स्कूल का माहौल बढ़िया हो गया . खूब अच्छी पढाई होने लगी .........

फिर साल भर बाद जब रिजल्ट आया तो सबको पता लगा की वाकई अच्छे दिन आ गए थे .......... आवारा लड़के और निकम्मे मास्टरों ने भी मजबूरी में ही सही , अनुशासन में रह के काम किया था , पढाई की थी , सो रिजल्ट अच्छा ही आया था .

शुरू में कुछ दिन लगेगा की ये कैसे दिन आ गए ......पर बाद में सबको पता चलेगा की अच्छे दिन आये हैं ........Have faith on your leader . He is an honest man . he's working hard ........ अच्छे दिन ज़रूर आयेंगे ......
कल शाम prem prakash भैया से मिलने उनके घर गया . देखा तो तोते उड़ गए . सिरपे पट्टी बंधी थी . मुह सूजा हुआ . भाभी जी काढा पिला रही थी . मैंने उनसे पूछा ? क्या हुआ कैसे लगी चोट . कोई जवाब न मिला . मैं समझ गया . घरेलू हिंसा हुई है .मैंने सिर्फ इतना कहा ........आप भी कमाल करती हैं ......इतना थोड़े न मारना चाहिए . भाभी जी फट पडी . अजी लडे मेरे दुश्मन . मैंने तो हाथ भी नहीं लगाया . खुद ही दीवारों में टक्कर मारते हैं . जब से रेल का किराया बढ़ा है . परेशान हैं . कल गाँव गए थे . बनारस से दुल्लहपुर का भाडा पहले 13 रु था . सत्या नास जाए मुई रेलवे का . बढ़ा के 14 रु कर दिया . बस इसी बात पे भड़क गए . बोले क्या यही अच्छे दिन हैं . इसी दिन के लिए मोदी को बैठाया था गद्दी पे ? अरे हमारे तो दुर्दिन आ गए ........और भैया लगे वहीं टिकट खिड़की पे , भोकर भोकर के रोने ........फिर लगे वहीं दीवार पे टक्कर मारने . लोगों ने किसी तरह पकड़ा .......माथा फूट गया ...... वो तो अच्छा हुआ , ब्रज भूषण दुबे जी साथ थे . उन्होंने समझाया . किसी तरह पकड़ा . गुस्से में कुर्ता फाड़ लिया अपना . परसों ही लिया था खादी भण्डार से, 550 रु का ......braj bhushan dube जी ने बहुत समझाया ..........बोले prem भैया , हम तो पहले दिन से ही जानते थे , की मोदिया एक नंबर का फ्रॉड है ........ कोई अच्छे दिन नहीं आने वाले ......... अच्छे दिन तो खाली अपने युगपुरुष अरविन्द केजरीवाल ही लिया सकते हैं इस देश में .......... इसी लिए तो आपने मोदी को वोट नहीं दिया . वोट तो हमको दिया . बटन झाडू पे दबाया तो अच्छे दिन भी वही से न आयेंगे ......किसी तरह समझा बुझा के घर लाये . डेढ़ सौ रुपया तो दवा दारू ,रुई पट्टी में लग गया .
मैंने प्रश्नवाचक निगाहों से prem भैया की और देखा . उन्होंने निगाहें फेर ली . फिर सुबकने लगे . भाभी जी ने रुमाल पकडाया . फिर बोली , वैसे जब से मोदी की सरकार बनी है , मुझे बड़ा आराम है . और किसी के आयें चाहे न आयें , मेरे अच्छे दिन तो आ गए हैं . पहले मुझ ही से लड़ते थे दिन रात . पर अब नहीं लड़ते . अब तो अगर दाल में नमक ज़्यादा गिर जाए तो भी मुझे कुछ नहीं कहते ........ उस दिन दीपू के नम्बर गणित में कम आये . पर दीपू को कुछ नहीं बोले ........ .लगे मोदी को गरियाने ............. गैस की पाइप लाइन फट गयी . 15 आदमी मर गए . मोदी को लगे गरियाने . मुझे बड़ा आराम है . सारा नजला आजकल मोदी पे ही गिर रहा है ...........
sex education .......

हर समाज की अपनी ज़रूरतें होती हैं . अपने मानदंड होते हैं . पश्चिम और पूर्व में ज़मीन आसमान का अंतर है ........ पश्चिम में 14 साल की लडकी जब अपने boyfriend के साथ डेट पे जाती है तो माँ उसके बैग में कंडोम डाल देती है , और उसे ये समझाती है की बिटिया , कंडोम का प्रयोग ज़रूर करना . स्कूल भी उसे 7th क्लास में ही ये समझाने लगता है ........condom क्यों ज़रूरी है . ये उस समाज की sex education है , जिसे वो बहुत ज़रूरी समझते हैं .

हमारे स्वस्थ्य मंत्री Dr Harshvardhan ये कहते हैं की schools में sex education में हमें पश्चिम को आँख बंद कर फॉलो करने की ज़रुरत नहीं है . हमारा समाज अलग है . हमारी ज़रूरतें अलग हैं . हमारे यहाँ सातवीं की लडकी को condom का महत्व पढ़ाने की ज़रुरत नहीं है . इसको पढ़ाने की ज़रुरत शायद BA या 12th में पड़े ......... महानगरों का कल्चर कस्बों और गाँवों से अलग है . वहाँ भी आवश्यकतानुसार इसे design करने की ज़रुरत है . sex education का syllabus design करते समय स्थानीय समाज की sensibilities को भी ध्यान में रखने की ज़रुरत है .

आप मुझे बताइए की Dr Harshvardhan ने इसमें क्या गलत कह दिया . हमारा मीडिया और विपक्ष Dr साहब के पीछे ऐसे पडा है मानो उन्होंने 16वीं सदी की बात कह दी हो .
  • युगल किशोर चन्द्राकर भारत मे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का एक बड़ा वर्ग पिछले कुछ वर्ष से लगातार ये प्रयास मे रहता है कि कैसे किसी भी विषय को विवादास्पद बनाया जाय।विशेषकर उन मुद्दों को जहाँ पर भारत या भारतीयता और विदेशियत से जुड़ा हो।निश्चित रूप से भारत के अंदर विदेशी एजेंसियाँ मीडिया का रूप लेकर जनता मे भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा कर रहीं है।
  • Vedprakash Jaiswal Kamalesh ShuklaK ji ye special news aap ko kis addhe ne de diya koi aap k liye special news paper nahi na chhapa tha us news ko maine TV par khud hi dekha tha
  • Yogendra Solanki Symptoms

    Most people who have become recently infected with HIV will not have any symptoms. They may, however, have a flu-like illness within a month or two after exposure to the virus, with fever, headache, tiredness, and enlarged lymph nodes (glands
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